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कृष्ण कुमार नाज़ की ग़ज़ल: जो ख़ुद उदास हो वो क्या ख़ुशी लुटाएगा

उर्दू अदब
                
                                                         
                            जो ख़ुद उदास हो वो क्या ख़ुशी लुटाएगा 
                                                                 
                            
बुझे दिये से दिया किस तरह जलाएगा 

कमान ख़ुश है कि तीर उस का कामयाब रहा 
मलाल भी है कि अब लौट के न आएगा 

वो बंद कमरे के गमले का फूल है यारो 
वो मौसमों का भला हाल क्या बताएगा  आगे पढ़ें

2 वर्ष पहले

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