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Urdu Poetry: बच गया आज तो कल उसको भुला भी दूंगा

उर्दू अदब
                
                                                         
                            अब सिवा मेरे कहीं उसका गुज़ारा भी नहीं 
                                                                 
                            
देख वो रुक गया गो मैंने पुकारा भी नहीं । 

बच गया आज तो कल उसको भुला भी दूंगा
अब तो दिल को मेरे यादों का सहारा भी नहीं । 

खत्म अफ़साना हुआ लुत्फ़ो-करम का यारो
अब वो मायल भी नहीं मुझको गवारा भी नहीं । 

रात के थाल को उलटा के वो काफ़ूर हुआ
सांवली शब के कने एक सितारा भी नहीं । 

सोज़ यूं बैठ के क़िस्मत को न कोसो अपनी
क्या वो खुश है जिसे तक़दीर ने मारा भी नहीं । 

~ कांतिमोहन 'सोज़'

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एक महीने पहले

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