किसी का हुक्म है सारी हवाएँ
हमेशा चलने से पहले बताएँ
कि उन की सम्त क्या है
किधर जा रही हैं
हवाओं को बताना ये भी होगा
चलेंगी अब तो क्या रफ़्तार होगी
हवाओं को ये इजाज़त नहीं है
कि आँधी की इजाज़त अब नहीं है
हमारी रेत की सब ये फ़सीलें
ये काग़ज़ के महल जो बन रहे हैं
हिफ़ाज़त उन की करना है ज़रूरी
और आँधी है पुरानी इन की दुश्मन
ये सभी जनते हैं
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