जगजीत सिंह - यानी ग़ज़ल गायकी के जादूगर, अपनी मौसिक़ी से मोजिज़े दिखाने वाले। जिस ग़ज़ल को गाते वो उस शायर से ज़्यादा जगजीत सिंह के नाम हो जाती। ऐसी ही एक ग़ज़ल है हस्तीमल हस्ती की, जिसे गाकर जगजीत सिंह ने अमर कर दिया और हस्तीमल हस्ती को अब जब इस ग़ज़ल के साथ याद किया जाता है तो जगजीत सिंह की आवाज़ भी कानों में सुनाई देने लगती है। वो मशहूर ग़ज़ल है -
प्यार का पहला ख़त लिखने में वक़्त तो लगता है
नए परिंदों को उड़ने में वक़्त तो लगता है
जिस्म की बात नहीं थी उन के दिल तक जाना था
लम्बी दूरी तय करने में वक़्त तो लगता है
गाँठ अगर लग जाए तो फिर रिश्ते हों या डोरी
लाख करें कोशिश खुलने में वक़्त तो लगता है
हम ने इलाज-ए-ज़ख़्म-ए-दिल तो ढूँढ़ लिया लेकिन
गहरे ज़ख़्मों को भरने में वक़्त तो लगता है
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