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Urdu Poetry: आँख से बिछड़े काजल को तहरीर बनाने वाले

उर्दू अदब
                
                                                         
                            आँख से बिछड़े काजल को तहरीर बनाने वाले
                                                                 
                            
मुश्किल में पड़ जाएँगे तस्वीर बनाने वाले

ये दीवाना-पन तो रहेगा दश्त के साथ सफ़र में
साए में सो जाएँगे ज़ंजीर बनाने वाले

उस ने तो देखे अन-देखे ख़्वाब सभी लौटाए
और थे शायद टूटी हुई ताबीर बनाने वाले

सोने की दीवार से आगे मेरे काम न आए
सच्चे जज़्बे मिट्टी को इक्सीर बनाने वाले

जुज्व-ए-शेर नहीं हैं 'क़ासिर' जुज़्व-ए-जाँ कर डाले
हम को जितने दर्द मिले थे 'मीर' बनाने वाले

~ ग़ुलाम मोहम्मद क़ासिर

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एक महीने पहले

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