आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

अंजुम रहबर: चाँदनी झील के पानी में नहाने आई

उर्दू अदब
                
                                                         
                            आग बहते हुए पानी में लगाने आई
                                                                 
                            
तेरे ख़त आज मैं दरिया में बहाने आई

फिर तिरी याद नए ख़्वाब दिखाने आई
चाँदनी झील के पानी में नहाने आई

दिन सहेली की तरह साथ रहा आँगन में
रात दुश्मन की तरह जान जलाने आई

मैं ने भी देख लिया आज उसे ग़ैर के साथ
अब कहीं जा के मिरी अक़्ल ठिकाने आई

ज़िंदगी तो किसी रहज़न की तरह थी 'अंजुम'
मौत रहबर की तरह राह दिखाने आई

हमारे यूट्यूब चैनल को Subscribe करें।

लिंक पर क्लिक करें और जुड़ें अमर उजाला काव्य के व्हाट्सएप चैनल से 

https://whatsapp.com/channel/0029VaXoA27A89Mp96alfc2o  


1 hour ago

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर