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Hindi Shayari: अदम गोंडवी की 2 बेहतरीन ग़ज़लें

उर्दू अदब
                
                                                         
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मुक्तिकामी चेतना, अभ्यर्थना इतिहास की ।
ये समझदारों की दुनिया है विरोधाभास की ।

आप कहते हैं जिसे इस देश का स्वर्णिम अतीत,
वो कहानी है महज़ प्रतिशोध की, संत्रास की ।

यक्ष-प्रश्नों में उलझकर रह गई बूढ़ी सदी,
ये प्रतीक्षा की घड़ी है क्या हमारी प्यास की ।

इस व्यवस्था ने नई पीढ़ी को आख़िर क्या दिया,
सेक्स की रंगीनियाँ या गोलियाँ सल्फ़ास की ।

याद रखिए यूँ नहीं ढलते हैं कविता में विचार,
होता है परिपाक धीमी आँच पर एहसास की ।

2-  आगे पढ़ें

भूख ले जाती है ऐसे मोड़ पर इंसान को

एक वर्ष पहले

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