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आज का शब्द: स्नेह और भवानीप्रसाद मिश्र की कविता- हर समय प्यार भा सकता है

आज का शब्द
                
                                                         
                            'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- स्नेह, जिसका अर्थ है- प्रेम, प्रणय, प्यार, मुहब्बत। प्रस्तुत है भवानीप्रसाद मिश्र की कविता- हर समय प्यार भा सकता है 
                                                                 
                            

हो दोस्त या कि वह दुश्मन हो,
हो परिचित या परिचय विहीन ;
तुम जिसे समझते रहे बड़ा
या जिसे मानते रहे दीन ;
यदि कभी किसी कारण से
उसके यश पर उड़ती दिखे धूल,
तो सख़्त बात कह उठने की
रे, तेरे हाथों हो न भूल ।
मत कहो कि वह ऐसा ही था,
मत कहो कि इसके सौ गवाह;
यदि सचमुच ही वह फिसल गया
या पकड़ी उसने ग़लत राह --
तो सख़्त बात से नहीं, स्नेह से
काम ज़रा लेकर देखो ;
अपने अन्तर का नेह अरे,
देकर देखो ।

कितने भी गहरे रहें गर्त,
हर जगह प्यार जा सकता है ;
कितना भी भ्रष्ट ज़माना हो,
हर समय प्यार भा सकता है ;
जो गिरे हुए को उठा सके
इससे प्यारा कुछ जतन नहीं,
दे प्यार उठा पाए न जिसे
इतना गहरा कुछ पतन नहीं ।
देखे से प्यार भरी आँखें
दुस्साहस पीले होते हैं
हर एक धृष्टता के कपोल
आँसू से गीले होते हैं ।
तो सख़्त बात से नहीं
स्नेह से काम ज़रा लेकर देखो,
अपने अन्तर का नेह
अरे, देकर देखो । आगे पढ़ें

2 वर्ष पहले

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