'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- उपजाऊ, जिसका अर्थ है- जिसमें अच्छी उपज हो, उर्वर। प्रस्तुत है केदारनाथ अग्रवाल की कविता- चंद्र गहना से लौटती बेर
देख आया चंद्र गहना।
देखता हूँ दृश्य अब मैं
मेड़ पर इस खेत की बैठा अकेला।
एक बीते के बराबर
यह हरा ठिंगना चना,
बाँधे मुरैठा शीश पर
छोटे गुलाबी फूल का,
सज कर खड़ा है।
पास ही मिल कर उगी है
बीच में अलसी हठीली
देह की पतली, कमर की है लचीली,
नील फूले फूल को सिर पर चढ़ा कर
कह रही है, जो छुए यह
दूँ हृदय का दान उसको।
और सरसों की न पूछो—
हो गई सबसे सयानी,
हाथ पीले कर लिए हैं,
ब्याह-मंडप में पधारी;
फाग गाता मास फागुन
आ गया है आज जैसे।
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