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आज का शब्द: पतवार और गोपालदास "नीरज" की कविता- नाव आगे नहीं बढ़ती

आज का शब्द
                
                                                         
                            'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- पतवार, जिसका अर्थ है- नाव का एक विशेष और मुख्य अंग जो पीछे की ओर होता है , इसी के द्वारा नाव मोड़ी या घुमाई जाती है, नाव को चलाने का डंडा। प्रस्तुत है गोपालदास "नीरज" की कविता- नाव आगे नहीं बढ़ती
                                                                 
                            

आज माँझी ने विवश हो छोड़ दी पतवार।

यत्न कर-कर थक चुका हूँ
नाव आगे नहीं बढ़ती-
और सारा बल मिटा है
भाग्य में मरना बदा है-
सोच कर सूने नयन ने छोड़ दी जलधार।
आज माँझी ने विवश हो छोड़ दी पतवार।

क्यों न हो उसको निराशा
जिसे जीवन में सदा ही-
खिलाती थी मधुर आशा
पर नियति का क्या तमाशा-
पार लेने चला था, पर हाँ! मिली मँझधार।
आज माँझी ने विवश हो छोड़ दी पतवार।

किन्तु है तू तो अरे! नर
बैठता क्यों हार हिम्मत
छोड़ आशा का सबल कर
उठ, जरा तो कमर कसकर
देख पग-२ पर लहरियाँ ही बनेंगी पार।
और यह तूफ़ान क्षण में ही बनेगा छार।
माँझी, छोड़ मत पतवार !

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एक महीने पहले

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