आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

आज का शब्द: नृप और राहुल शिवाय की कविता- क्यों न बोलें ये व्यथाएँ

आज का शब्द
                
                                                         
                            'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- नृप, जिसका अर्थ है- राजा। प्रस्तुत है राहुल शिवाय की कविता- क्यों न बोलें ये व्यथाएँ
                                                                 
                            

झूल जाओ प्राण तज दो
क्यों न बोलें ये व्यथाएँ

जो हमेशा ही सहेजा
नग्न होकर वह पड़ा था
गिद्ध नर के सामने बस
मान माँसल चीथड़ा था

देह पर ज्यों चल रही हैं
नाग-सी अब भी भुजाएँ

था यही अपराध तन का
वह किसी को भा गया था
खेलने की चीज थी जो
खेलकर छोड़ा गया था

है हुआ अभियोग तन पर
औ घृणा करती दिशाएँ

पाँडवी आक्रोश भी जब
व्यस्त है सबकुछ भुलाकर
नृप बना धृतराष्ट्र सम जब
है सभा चुप, सिर झुकाकर

हस्तिनापुर लिख रहा है
कृष्ण बिन जब विवशताएँ

हमारे यूट्यूब चैनल को Subscribe करें।

1 hour ago

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर