'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- कुल, जिसका अर्थ है- एक ही पूर्वपुरुष से उत्पन्न व्यक्तियों का समूह या वर्ग, वंश, घराना, जाति, समूह, समुदाय। प्रस्तुत है जयशंकर प्रसाद की कविता- बीती विभावरी जाग री!
बीती विभावरी जाग री!
अंबर पनघट में डुबो रही—तारा-घट उषा नागरी।
खग-कुल कुल-कुल-सा बोल रहा,
किसलय का अंचल डोल रहा,
लो यह लतिका भी भर लाई—मधु मुकुल नवल रस गागरी।
अधरों में राग अमंद पिए,
अलकों में मलयज बंद किए—
तू अब तक सोई है आली। आँखों में भरे विहाग री!
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