आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

आज का शब्द: जटा और नागार्जुन की कविता- दो शिखरों के अन्तराल वाले जँगल में

आज का शब्द
                
                                                         
                            'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- जटा, जिसका अर्थ है- लट के रूप में गुथे हुए सिर के बड़े-बड़े बाल, पटसन। प्रस्तुत है नागार्जुन की कविता- दो शिखरों के अन्तराल वाले जँगल में
                                                                 
                            

मैंने देखा :
दो शिखरों के अन्तराल वाले जँगल में
आग लगी है ...

बस अब ऊपर की मोड़ों से
आगे बढ़ने लगी सड़क पर
मैंने देखा :
धुआँ उठ रहा
घाटी वाले
खण्डित-मण्डित अन्तरिक्ष में
मैंने देखा : आग लगी है
दो शिखरों के अन्तराल वाले जँगल में ।

मैंने देखा : शिखरों पर
दस-दस त्रिकूट हैं
यहाँ-वहाँ पर चित्र-कूट हैं
दाएँ-बाएँ तलहटियों तक
फैले इनके जटा-जूट हैं
सूखे झरनों के निशान हैं
तीन पथों में बहने वाली
गँगा के महिमा-बखान हैं
दस झोपड़ियाँ, दो मकान हैं

इनकी आभा दमक रही है
इनका चूना चमक रहा है
इनके मालिक वे किसान हैं
जिनके लड़के मैदानों में
युग की डाँट-डपट सहते हैं
दफ़्तर में भी चुप रहते हैं ।

हमारे यूट्यूब चैनल को Subscribe करें।

3 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर