'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- जनजीवन, जिसका अर्थ है- सामान्य लोगों का जीवन या लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी। प्रस्तुत है अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' की कविता- प्रतिदिन पूजें भाव से चढ़ा भक्ति के फूल
सुरसरि सी सरि है कहाँ मेरु सुमेर समान।
जन्मभूमि सी भू नहीं भूमण्डल में आन।।
प्रतिदिन पूजें भाव से चढ़ा भक्ति के फूल।
नहीं जन्म भर हम सके जन्मभूमि को भूल।।
पग सेवा है जननि की जनजीवन का सार।
मिले राजपद भी रहे जन्मभूमि रज प्यार।।
आजीवन उसको गिनें सकल अवनि सिंह मौर।
जन्मभूमि जल जात के बने रहे जन भौंर।।
कौन नहीं है पूजता कर गौरव गुण गान।
जननी जननी जनक की जन्मभूमि को जान।।
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