आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

आज का शब्द: गाढ़ा और यश मालवीय की सुप्रसिद्ध रचना- दबे पैरों से उजाला आ रहा है

आज का शब्द
                
                                                         
                            'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- गाढ़ा, जिसका अर्थ है- जिसमें जल के साथ कोई चूर्ण मिला हो, घना, ठस, मोटा। प्रस्तुत है यश मालवीय की रचना- दबे पैरों से उजाला आ रहा है
                                                                 
                            

दबे पैरों से उजाला आ रहा है
फिर कथाओं को खँगाला जा रहा है

धुंध से चेहरा निकलता दिख रहा है
कौन क्षितिजों पर सवेरा लिख रहा है
चुप्पियाँ हैं जुबाँ बनकर फूटने को
दिलों में गुस्सा उबाला जा रहा है

दूर तक औ' देर तक सोचें भला क्या
देखना है बस फिजाँ में है घुला क्या
हवा में उछले सिरों के बीच ही अब
सच शगूफे सा उछाला जा रहा है

नाचते हैं भय सियारों से रँगे हैं
जिधर देखो उस तरफ कुहरे टँगे हैं
जो नशे में धुत्त हैं उनकी कहें क्या
होश वालों को सँभाला जा रहा है

स्थगित है गति समय का रथ रुका है
कह रहा मन बहुत नाटक हो चुका है
प्रश्न का उत्तर कठिन है इसलिए भी
प्रश्न सौ-सौ बार टाला जा रहा है

सेंध गहरी नींद में भी लग गई है
खीझती सी रात काली जग गई है
दृष्टि में है रोशनी की एक चलनी
और गाढ़ा धुआँ चाला जा रहा है
4 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर