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आज का शब्द: अनुनय और फणीश्वर नाथ रेणु की कविता... जागो मन के सजग पथिक ओ!

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हिंदी हैं हम शब्द-श्रृंखला में आज का शब्द है अनुनय जिसका अर्थ है 1. विनय 2. प्रार्थना 3. ख़ुशामद। कवि फणीश्वर नाथ रेणु ने अपनी कविता में इस शब्द का प्रयोग किया है।

मेरे मन के आसमान में पंख पसारे
उड़ते रहते अथक पखेरू प्यारे-प्यारे!
मन की मरु मैदान तान से गूंज उठा
थकी पड़ी सोई-सूनी नदियां जागीं
तृण-तरू फिर लह-लह पल्लव दल झूम रहा
गुन-गुन स्वर में गाता आया अलि अनुरागी
यह कौन मीत अगनित अनुनय से
निस दिन किसका नाम उतारे!
हौले, हौले दखिन-पवन-नित
डोले-डोले द्वारे-द्वारे!
बकुल-शिरिष-कचनार आज हैं आकुल
माधुरी-मंजरी मंद-मधुर मुस्काई
क्रिश्नझड़ा की फुनगी पर अब रही सुलग
सेमन वन की ललकी-लहकी प्यासी आगी
जागो मन के सजग पथिक ओ!
अलस-थकन के हारे-मारे
कब से तुम्हें पुकार रहे हैं
गीत तुम्हारे इतने सारे।

4 वर्ष पहले

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