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कबीर के 5 चुनिंदा दोहे, जिनमें छिपा है जीवन का सार

साहित्य
                
                                                         
                            कबीर गर्ब न कीजिये, इस जीवन की आस 
                                                                 
                            
टेसू फूला दिवस दस, खंखर भया पलास ।।


भावार्थ:-
कबीर कहते हैं कि इस जवानी कि आशा में पड़कर अहंकार नहीं करना चाहिए, क्योंकि दस दिनों में फूलों से पलाश लद जाता है, फिर फूल झड़ जाने पर वह उखड़ जाता है, वैसे ही जवानी को समझो।
 

एक घड़ी आधी घड़ी, आधी में पुनि आध
कबीर संगत साधु की, कटै कोटि अपराध।।


भावार्थ:-
एक पल आधा पल या आधे का भी आधा पल ही संतों की संगत करने से मन के करोड़ों दोष मिट जाते हैं।।
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एक महीने पहले

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