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Happy Teachers Day 2026: गुरु महिमा पर कबीर के 5 चुनिंदा दोहे

साहित्य
                
                                                         
                            गुरु पारस को अन्तरो, जानत हैं सब सन्त।
                                                                 
                            
वह लोहा कंचन करे, ये करि लये महन्त॥

भावार्थ:-
गुरु में और पारस-पत्थर में अन्तर है, यह सब सन्त जानते हैं। पारस तो लोहे को सोना ही बनाता है, परन्तु गुरु शिष्य को अपने समान महान बना लेता है।

सतगुरु तो सतभाव है, जो अस भेद बताय।
धन्य शिष धन भाग तिहि, जो ऐसी सुधि पाय॥

भावार्थ:-
सद्गुरु सत्य- भाव का भेद बताने वाला है। वह शिष्य धन्य और भाग्यशाली है जो गुरु के द्वारा अपने स्वरूप की सुधि पा गया है।
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2 वर्ष पहले

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