किसी बज़्म से,अब कोई सरोकार नहीं मुझे।
किसी दवा-ओ-मरहम की,दरकार नहीं मुझे।।
किसी को पास बुलालूं,बहला लूं मैं खुद को।
यक़ीनन, अब तो ये भी इख़्तियार नहीं मुझे।।
-यूनुस खान
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