नये ख़तों में, कुछ पैग़ाम पुराने निकले।
ये मेरे जख़्म,अश्कों के दीवाने निकले।।
ख़ामोशियां अपने उरूज़ पर यूं पहुंची।
कि बज़्म के उस पार , वीराने निकले।।
-यूनुस खान
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