जख़्म, और गहरा हुआ जाता है।
दवाओं पर, पहरा हुआ जाता है।।
ऐ अब्र , मेरे आंगन भी तो बरस।
आंगन अब सहरा हुआ जाता है।।
-यूनुस खान
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