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चलती हुई रात

                
                                                         
                            ये ढलती हुई रात , क्यूं सताती रही हमें।
                                                                 
                            
शुआ-ए-सहर, नींद से जगाती रही हमें।।

सोचा था,कि सोकर थोड़ा सुकूं मिलेगा।
पर मुसलसल, तेरी याद आती रही हमें।।

तुम अब चल दिये,और अब आ रहे हो।
कोई आहट सारी रात बताती रही हमें।।
-यूनुस खान
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58 मिनट पहले

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