ये ढलती हुई रात , क्यूं सताती रही हमें।
शुआ-ए-सहर, नींद से जगाती रही हमें।।
सोचा था,कि सोकर थोड़ा सुकूं मिलेगा।
पर मुसलसल, तेरी याद आती रही हमें।।
तुम अब चल दिये,और अब आ रहे हो।
कोई आहट सारी रात बताती रही हमें।।
-यूनुस खान
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