अपना दर्द,यूं सर-ए-बज़्म बताते कैसे।
बिन तेरे जख़्मों पे मरहम लगाते कैसे।।
तौहीन-ए-उल्फत का , ख्याल था हमें।
फिर, अश्क बहाकर ग़म जताते कैसे।।
यूनुस खान
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