चलो ना यारो, कुछ देर दुनिया को भूल चलते है,
इस झूठी दुनिया से कहीं थोड़ा दूर चलते है.
रोज़ रोज़ की इस दुनियादारी से थोड़ा बाहर निकलते है,
साथ मिलकर चलो ना, थोड़ा हम सभी मजा करते है,
दुनियावालों की आवाज़ सुनकर अब कान थक से गए है,
क्यों ना हम यारो, अपने दिल को आवाज़ को सुनते है.
चलो ना यारो फिर से हम अपने पुराने दिनों में चलते है,
सभी यारो के साथ हम अपने नाके पर मिलते है,
कुछ सपने, कुछ बिखरी हुई यादें बांट लेते है,
कुछ हम अपने गम और कुछ खुशियां बांट लेते है.
ना कोई बड़ा, ना कोई छोटा, सब यार एक बस जैसे है,
हम थोड़ी देर के लिए ये सारे भेद भाव छोड़ देते है,
बस दिल में कुछ पल, कुछ लम्हे छोड़ गए है,
ना जाने अब वो दिन, वो यार कहा खो गए है.
चलो ना यारो, कुछ देर दुनिया को भूल चलते है,
इस झूठी दुनिया से कहीं थोड़ा दूर चलते है.
कवि:- योगेश शुक्ला
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