मुझको बस रावण दिखता है
नेताओ के वेश में
जो सदा जलता रहता है
ईर्ष्या और द्वेष में
ना जनता के दिल जीतने
नेक कार्य की आशा से
इनको है बस भीड़ जुटानी
राजनीति की भाषा से
ये न्याय के दाता बनकर
संसद में दंगा करते है
काले धन से झोली भरकर
निर्धन को नंगा करते है
ये स्वर्ण के महल में रहकर
धर्म का धंधा करते है
जो इनको है आंख दिखाते
उन सबको अंधा करते है
न जाने कब देश मे मेरे
ऐसा शासन आएगा
जब देश का हर एक नेता
सत्यनिष्ठ बन जायेगा
उस दिन सबको राम दिखेंगे
नेताओ के वेश में
जो सदा पूजे जाएंगे
राज्य देश विदेश में
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