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आजादी की सुबह

                
                                                         
                            आजादी की सुबह कुछ ऐसी थी...
                                                                 
                            
हवा में रस घुला, माथे पर तिरंगा लगा ...
हंसते चेहरों में जैसे कोई अंतहीन ऊर्जा ....
कोई अपनी ही धुन में लगा तो कोई राष्ट्र की...
पर सुबह ...सुबह जैसी थी.....
 
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6 घंटे पहले

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