ख़ुद को मुसलमान समझने वाले पहले होश में आ
अपने घर से नक़ाब पहनने का सिलसिला हटा दो
तब देखने मिलेगा तुम्हारी बेटी और बीबी मे हया
नक़ाब में बेहयाई,बुराई और मक्कारी आम होगई है
आंखें खोलकर देखो तब अहसास होगा हिज़ाब का
क्यूंकि आपसी तालमेल से दूसरे का मज़ा चखना है
हमने सर्च किया तहकीक किया फिर मुंह खोल दिया
99 फ़ीसद नक़ाब में औरतों की शर्मगाह महफूज़ नही है
मौलाना, मुफ्ती अपनी मुफाद में धर्म को नीलाम कर दिया
आज़मा लो मेरे फ़रमान को _ उसकी नक़ाब उतरवा कर
-वसी अहमद क़ादरी
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