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मुफक्किर तो बहुत हैं इस जहान में ढूंढिए एक तो हजारों मिलते हैं

                
                                                         
                            मुफक्किर तो बहुत हैं इस जहान में ढूंढिए एक तो हजारों मिलते हैं
                                                                 
                            
मुफक्किर ए ब्रह्माण्ड एक ही मिलते गूगल के तहकीक से वसी अहमद कादरी
एक जो खुदको मुफक्किर इस्लाम बोलते थे जिनका नाता सियासत से था
जबकि हमने सियासत का दर नहीं देखा उम्र मौत के क़रीब आ चुकी है
एक है जोकर शायर जिसे एक सियासी दल राज्य सभा में लाया है
वसी की लेख वो दुआ से देश रौशन है जो अंधेरी कोठरी मे रहते हैं

- वसी अहमद कादरी! वसी अहमद अंसारी!
गुप्त कवि! रहबर इंसानियत ! ब्रह्माण्ड विचारक
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2 वर्ष पहले

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