न कुछ दे रहा है न ही मांग रहा है वसी_ आख़िर ये हिकमत क्या है
जन्म देने वाला क्या बोल रहा है बहुत लोग नहीं समझते हैं जहान में
अनाज, पेड़ पौधे किसने लगाया उगाया गंभीरता से सोचना होगा
हंसने हंसाने रुलाने की कला होती इंसान में मग़र रोने का नही होता
दिल से आह निकलती है आंखों से आंसू निकलना ख़ुदा की देन है
झोपड़ी व महल अच्छा ख़राब की सूझ बूझ आदमी समझ लेता है
बेईमानी,हत्या करना झूठ बोलने में ये कहता है लिखा है क़िस्मत में
आदमी से आदमी हैरान है बताऊँ ख़ुदा किसी को परेशान नहीं करता
यक़ीनन दौलत वो ताक़त की पूजने वाले में कोई सूझ बूझ नहीं होता
जो कातिल को सज़ा न दे वह जज जमीं पर बड़ा कातिल होता है
क़त्ल आम हो रहा है दुनियां में ख़ुदा आदमी नहीं जो रुकवा दे _वसी
निकाल दो सभी लोग अपने अपने दिल से उसने दिमाग़ दिया है दिमाग
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