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बलदेव नामक मजदूर और चांद

                
                                                         
                            जब बलदेव नामक मजदूर के अधेड़ उमर के कंधे थक जाते हैं,
                                                                 
                            
जब उसके पैरों मे मानो पत्थर बंध जाते है,
और जब उसके पेट को दीमक चर जाते है,
तब वो चांद आता है बताने,
जा सो जा कल की सुखी रोटी खा के,
सुलादे अपने लड़के को एक लोरी गा के,
भरोसा रखना कल भी आऊंगा,
भले ही कुछ घंटों के लिए ही,
मगर सब खत्म होने का एहसास कराउंगा ।
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7 hours ago

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