सावन में आते हैं बादल के फाये ,
सजाते धरा को बरसते - बरसते ।
हरित मयी देखो धरा हो गई है ,
चमन की फिजा क्या गजब हो गयी है।
डालों पर झूलों की होड़े लगी हैं ,
मल्हारों की मीठी सरगम छिड़ी है ।
वहिना भी राखी सजाये है आयी ,
कलाई में बाँधी और ज्योती जगायी ।
भाई भी देखो गदगद हुआ है,
बहिना के चरणों को झुककर छुआ है ।
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