वह पाटा झूला सब छूटा।
बीते कल से नाता टूटा।
धन्नी चिड़िया मच्छरदानी।
सब भूल चुके पर पहचानी सी -
यादों की सूखी धरती पर।
सावन का बादल फूटा।
वह पाटा झूला सब छूटा।
बीते कल से नाता टूटा।
राखी के सब पैसे बाक़ी।
लौटाऊँगा बूढा काकी।
फ़िर तुम मुझसे ये मत कहना।
तुमने चीट किया या लूटा।
वह पाटा झूला सब छूटा।
बीते कल से नाता टूटा।
-विकास कालाआमी
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