आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

निर्ममता से ठगा ममता को

                
                                                         
                            निर्ममता से ठगा ममता को,
                                                                 
                            
दशकों पूर्व गाय हत्या पर उठाता नहीं कोई सवाल,
गाय प्यार लुटाती दूध देती,
गौ पालन अच्छा रोजगार,
रहती नहीं गरीबी,
जब तक दूध देती कहलाती मां ,
खल चारा खिलाते,
दूध देना बंद कर देती,
बेच देते कसाई को,
हिंदू भी मूक मांस की दुकान के,
आगे थूकते,
मुंह फेर कर चल देते,
निर्ममता से ठगा ममता को,
बछड़ा पैदा हुआ,
बोझ लगता,
मार देते ,
खाल में भुस भरकर,
गाय के सामने खड़ा कर देते,
गाय चाटती दूध देती,
निर्ममता से ठगा ममता को,
हाथ में महंगे महंगे पर्स लेकर घूमते,
जूते चप्पल महंगे महंगे
जैकेट गर्म आरामदलक
प्यार से देते मां को मदर डे पर,
कितना दर्दनाक उपहार
एक बछड़े को पीटते,पीटते ,
प्राण निकल जाए
खाल नर्म पड़,
फिर बनते आराम दायक उपहार
निर्ममता से ठगा ममता को
आज योगी जी ने सुधि ली गौ माता की,
गौ हत्या की आशंका पर भी,
पीट पीट कर मार डालते,
आज गाय को डंडा मारने वाले,
घटते जा रहे
चारा डालने वाले बढ़ते जा रहे।
मुसलमान इस्लाम के नाम पर एक,
हिंदू गाय के नाम पर एक....
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर