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हावी पर एक कविता

                
                                                         
                            इंसान हावी इसलिए नहीं हुआ,
                                                                 
                            
वो होशियार था आपसे
हावी हुआ, ऊंची आवाज से,
कभी भद्दी भाषा से,
ऊंची आवाज से डरने लगे,
भद्दी भाषा से बचने के लिए,
जो वो कहता ,करते गए,
भद्दी भाषा,ऊंची आवाज ताकत बनी,
डरना और बचना कमजोरी,
माफ करने,हंस कर टाल देने से,
स्थितियां विकराल होती जाती,
जिंदगी विकट होती जाती,
जब तक जैसे को तैसा नहीं करोगे,
जिंदगी में सवाल खड़े हो जाएंगे,
नरम दिल,दरिया दिल इंसान किसी का दिल दुखाना नहीं चाहता,
वो कभी कटपुतली,
कभी पंचिंग मशीन बन जाता।
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2 वर्ष पहले

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