आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

चेन्नई का बीच

                
                                                         
                            दूर तक रेत ही रेत
                                                                 
                            
एशिया का सबसे बीच,
चलना मुश्किल,
धंसते पांव,
तट को स्पर्श करतीं चंचल लहरें
मौज में डूबे इंसान,
लहरों के साथ कोलाहल करते,
वेग से आती धवल चांदी सी लहरें,
मनोरम सवेरा तन को छूती पवन,
दूर तक नीर,
अदृश्य छोर
नाविक की नावें लहरों से कर रहीं मुठभेड़,
सूरज के सात घोड़े,
किरणों की लगाम,
तीव्र गति से दौड़ रहे,
पलक झपकते सागर में समा गया
ताम्रवर्णी हुआ सागर,
मानो ग्रीष्म से राहत पाने सूरज ,
लहरों से किलोल क्रीड़ा कर रहा,
सांझ को तट पर सुकून,
सूरज के घोड़े लौट रहे,
सागर नीला
तट पर चहल पहल,
चटकारे अनोखे,
छोटे छोटे आमले,
नमक मिर्च में डूबे,
कसैला पन गायब खट्टा,
मीठा कटहल,
नारंगी नारियल पानी,
उत्तर भारतीयों के लिए अपरिचित स्वाद,
सांझ देखते ही देखते रात ,
चांद तारों से सजा आसमान,
काला सागर लहर चांदी सी चमक रही,
बंगाल की खाड़ी
वरदान चेन्नई के लिए,
मछली व्यवसाय पनपता,
पर्यटकों का आकर्षण का केंद्र,
सागर का तट आनंद विभोर कर जाता,
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
4 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर