तेल के दाम आसमान छूने लगे हैं,
सपनों के घर भी अब टूटने लगे हैं।
जंग की आग दूर कहीं भड़की होगी,
पर दर्द यहाँ हर घर में फूटने लगे हैं।
-विजय बिंदास राजा
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