निशा जितनी सघन होगी, प्रभात उतना ही स्वर्णिम होगा,
तुम्हारे कठिन संघर्ष से, इतिहास में नाम अंकित होगा।
शेष दूरी का चिंतन छोड़, लक्ष्य पथ पर अग्रसर हो तुम,
हे पथिक अपनी मेधा से, नव युग का निर्माण करो तुम।
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