आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

शायद पहले बदलाव बाहर नहीं

                
                                                         
                            हर दिन कुछ नया नहीं होता…
                                                                 
                            
कभी वही पुरानी सुबह, वही ढलती सांझ
वही चमकती तारों की टिम टिम
वही जिम्मेदारियाँ और वही संघर्ष लौटकर आते हैं।
लेकिन हर बीतता दिन हमें थोड़ा और मजबूत,
थोड़ा और समझदार और खुद के थोड़ा और करीब ले जाता है।
इसलिए अगर आज कुछ बदला हुआ नजर नहीं आ रहा,
तो उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए।
शायद पहले बदलाव बाहर नहीं, आपके भीतर हो रहा है। विश...
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
6 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर