राहत मिलता है
जब वो साथ होते हैं।
सुकूँ मिलता है
जब वो पास होते हैं।
अजनबी नहीं हैं
ये वो भी समझते हैं।
फ़िर भी ग़ैरों कि बातों में
बहक जाते हैं।
ग़ैरों को सुकून मिलता है
जब हम आपस में उलझ जाते हैं।
ना चाहते हैं वो भला किसी का
वो कहते हैं न....
इंसा परेशाँ नहीं अपने दुख से
वो दूसरों के सुख से परेशाँ हो जाता हैं।
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