आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

इंसा परेशाँ नहीं अपने दुख से!

                
                                                         
                            राहत मिलता है
                                                                 
                            
जब वो साथ होते हैं।

सुकूँ मिलता है
जब वो पास होते हैं।

अजनबी नहीं हैं
ये वो भी समझते हैं।

फ़िर भी ग़ैरों कि बातों में
बहक जाते हैं।

ग़ैरों को सुकून मिलता है
जब हम आपस में उलझ जाते हैं।

ना चाहते हैं वो भला किसी का
वो कहते हैं न....

इंसा परेशाँ नहीं अपने दुख से
वो दूसरों के सुख से परेशाँ हो जाता हैं।
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर