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ख़ुशगवारी में उनके अक्स आने दो।

                
                                                         
                            ये अक्स सी नुमा मुस्तकिल रिवायत है,
                                                                 
                            
जाने दो इसको लिहाज़-ए-ख़ुशगवारी तक।

ये इंतिहाई ज़ुल्म-ए-शुमार रिवायत है,
जाने दो इसको लिहाज़-ए-ख़ुशगवारी तक।

ये इम्तियाज़-ए-रिवायत को,
दस्तक देने दो अना-परस्तों तक।

वही दास्तान-ए-रिवायत जो सदियों से लोगों
की अना बतौर शुमार होती आ रही है,
जाने दो इसको चश्म-ए-मुरव्वत तक।

जो रिवायत बनी अना-परस्तों की रस्सी, जिसने
हुस्न-ए-शुमार बशर को ज़िंदा ख़त्म कर दिया है,
ख़त्म हो जाने दो उसको अब रसीद-ए-अज़ियत तक।

अब जीने दो उनको जिनकी पहचान-ए-दास्ताँ
को क़त्ल कर दिया गया है,
ज़िंदगी-ए-दस्तक देने दो उन्हें, लिहाज़-ए-
ख़ुशगवारी में उनके अक्स आने दो।
 
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44 मिनट पहले

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