बाबू जी
मेरे हर दर्द की
बाबू जी थे दवाई
बाबू जी का था ये कहना
जीवन है अनमोल खजाना
हरदम सबके काम आना
कभी किसी का दिल न दुखाना
जेठ की दुपहरी में
बाबू जी थे खस की चटाई
मेरे हर दर्द की
बाबू जी थे दवाई
बाबू जी से सीखा मैंने
हरदम ही आगे बढ़ना
जिंदगी की चुनौतियों का
डट कर सामना करना
पूस की ठ॔डी रात में
बाबू जी थें गरम रजाई
मेरे हर दर्द की
बाबू जी थे दवाई
बाबू जी का जीवन था अनुशासित
करता था हम सबको प्रेरित
ईमानदारी का पाठ पढ़ातें
सही राह हमको दिखलातें
चाहे कोई समस्या हो
करते थें हौसला अफजाई
मेरे हर दर्द की
बाबू जी थे दवाई
डा. उषा पाण्डेय
मौलिक
पितृपक्ष में
बाबू जी
स्वर्गीय बामदेव त्रिपाठी
को समर्पित
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