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वो एक स्त्री है

                
                                                         
                            सब को खुश करके
                                                                 
                            
अंदर ही अंदर रो लेती है
कोई बताये मुझे भी क्यों
वो एक स्त्री है।
इतने तानने सुनके भी
सबके साथ खड़ी है
बुरा उससे भी लगता है
क्यों वो एक स्त्री है
उसे तो अपनो की चिंता रहती
दूसरों की क्या पड़ी है
खुद का भी तो सहारा बन
तू एक स्त्री है
अपना घर छोड़ के चली जाती है
ज़रूरी है ससुराल में
शहज़ादी बन के ही रहे पाती हो
वो एक स्त्री है
आजमाओ तो अपनो के लिए
सब कुछ कर जाती है
क्या यह समाज बदल पाएगा
कोई पुरुष कभी स्त्री जितना सहे पाएगा
कभी स्त्री को दिल से लगाके तो देखो तुम्हे खुद
माँ पार्वती का रूप नज़र आएगा।।।।।
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49 मिनट पहले

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