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वह जामवंत कहलाता है

                
                                                         
                            वह जामवंत कहलाता है
                                                                 
                            

युगों-युगों का अनुभव लेकर,
धर्म-पथों का चिंतन लेकर,
वृद्ध देह, पर दृष्टि प्रखर थी,
मन में युग का दर्शन लेकर।
जो खुद पीछे रहकर भी फिर,
औरों का दीप जलाता है—
जो भूली शक्ति जगा देता,
वह जामवंत कहलाता है॥


वानर-दल जब खोज में निकला,
सीता का कुछ पता न निकला,
दक्षिण तट पर सागर देखा,
हर साहस कुछ पल को पिघला।
जहाँ असंभव दिखता सबको,
वह संभावना दिखाता है—
जो भूली शक्ति जगा देता,
वह जामवंत कहलाता है॥


सागर सम्मुख मौन खड़ा था,
प्रश्न स्वयं पर्वत-सा बड़ा था,
कौन लाँघकर पार पहुँचता?
हर योद्धा मन में अड़ा था।
किसमें कितना सामर्थ्य छिपा है,
वह पल भर में जान जाता है—
जो भूली शक्ति जगा देता,
वह जामवंत कहलाता है॥


एक किनारे मौन पवनसुत,
बैठे अपनी शक्ति भुलाकर,
जिनके भीतर पर्वत-सा बल,
वे बैठे थे शीश झुकाकर।
हीरा अपनी कीमत भूले तो,
जौहरी मूल्य बताता है—
जो भूली शक्ति जगा देता,
वह जामवंत कहलाता है॥


“तुम पवनपुत्र, बल के सागर,
क्यों बैठे हो स्वयं भुलाकर?
ज्ञान, विवेक, पराक्रम तुममें,
कौन रुकेगा राह में आकर?”
शब्द जहाँ विश्वास बनें तो,
सोया पर्वत जग जाता है—
जो भूली शक्ति जगा देता,
वह जामवंत कहलाता है॥


स्मृति लौटी, विश्वास जगा फिर,
हनुमत का पुरुषार्थ जगा फिर,
तन ने पर्वत-रूप धरा तो,
दल का बुझता हर्ष जगा फिर।
सच्चा गुरु बस राह दिखाकर,
शिष्य को नभ तक पहुँचाता है—
जो भूली शक्ति जगा देता,
वह जामवंत कहलाता है॥


एक छलाँग, समुद्र लँघा था,
लंका का अभिमान हिला था,
सीता को संदेश मिला फिर,
राम-विजय का द्वार खुला था।
एक सही विश्वास किसी का,
इतिहास बदल भी जाता है—
जो भूली शक्ति जगा देता,
वह जामवंत कहलाता है॥


लंका पहुँची राम की सेना,
रण में केवल बल क्या देना?
कब रुकना, कब कदम बढ़ाना,
विवेक बिना क्या युद्ध है जीतना?
शौर्य जहाँ आवेश बने तो,
वह संयम भी सिखलाता है—
जो भूली शक्ति जगा देता,
वह जामवंत कहलाता है॥


लक्ष्मण जब रणभूमि में गिरे,
आशा के सब दीपक घिरे,
औषधि लाने कौन जाएगा?
प्रश्न खड़े थे चारों ओर।
संकट जब सब राहें रोके,
वह फिर मार्ग सुझाता है—
जो भूली शक्ति जगा देता,
वह जामवंत कहलाता है॥


हनुमत फिर आकाश में छाए,
जीवन-दायी पर्वत लाए,
लक्ष्मण ने फिर आँखें खोलीं,
राम-दल में प्राण समाए।
जिसकी प्रेरणा प्राण बचाए,
वह खुद कहाँ श्रेय जताता है—
जो भूली शक्ति जगा देता,
वह जामवंत कहलाता है॥


राम-कथा में वीर बहुत हैं,
शौर्य भरे अध्याय बहुत हैं,
कुछ रण में इतिहास लिखें तो,
कुछ के मौन उपाय बहुत हैं।
जो पीछे रहकर दिशा दिखाए,
वह भी इतिहास बनाता है—
जो भूली शक्ति जगा देता,
वह जामवंत कहलाता है॥


हर युग को हनुमान मिलेंगे,
बल के कितने प्रमाण मिलेंगे,
पर अपनी सामर्थ्य जगाने,
क्या सबको जामवंत मिलेंगे?
जो तुममें तुमसे अधिक देखे,
वही तुम्हें तुमसे मिलाता है—
जो भूली शक्ति जगा देता,
वह जामवंत कहलाता है॥
— संतोष कुमार शर्मा
 
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46 मिनट पहले

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