सिलबट्टे वाला पत्थर सिर्फ पत्थर नहीं था जनाब,
हमारी दादी,नानी और मां के हाथों की शान था,
सिलबट्टे पर पीसी चटनी आज भी यादों का संसार है,
मिक्सी में स्वाद कहा, जो मां के हाथों में था,
आज मिक्सी में दुनिया क़ायम है, पर,
मां के हाथों वाला जोर नहीं,
हम ने मिक्सी से तरक्की तो कर ली, परंतु
अपना स्वाद कही पीछे छोड़ आईं।
-आकांक्षा गुप्ता
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