क्या करें, मोहब्बत की राहों में ख़सारा है,
वो हमारा है ही नहीं, जो हमें सबसे प्यारा है।
ज़िंदगी भर इंतज़ार करते रहे उस मंज़िल का,
जिसे माँगा था दुआओं में, वही मुक़द्दर को न गवारा है ।
-नाज़िया चिश्ती
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