"मैं अटल हूं "
मैं अटल हूं शिखर की तरह,जीवन्त अटल विश्वास हूं,
राजनीति है धर्म मेरा हर जीवन का मैं द्रढ अहसास हूं।
मतलब परस्ती हूं दूर मैं भारत का सुदृढ़ इतिहास हूं,
कर्तव्य निष्ठा है संस्कृति मेरी जीवटता का मैं सार हूं।
जीवन में हूं सत्य मैं दुश्मन के लिए पाषाण खंड
अपने भारत में भर सकता जीवन की उमंग तरंग।
नहीं चाहिए ऐसी सत्ता जहां झुक झुक कर चलना हो
कदम क़दम पर विरोधी के आगे मजबूरन झुकना हो।।
कर्मठता है उद्देश्य मेरा भारत में सुनहरे रंग भरना
दुश्मन की हठधर्मिता का मजबूती से दमन करना।
दुनिया रोक नहीं सकती मुझको जो मुझे करना है
पोखरण के इतिहास को दुनिया में अमर करना है।।
दूध का बदला खीर से तो गोली का बदला गोले से देंगे
आंखें उठाकर देखे दुश्मन उसके घर में चीर देंगे।
भारत के बच्चे बच्चे में राष्ट्र प्रेम की उमंग भरना है
अपने भारत के बच्चों का भविष्य अटल करना है।।
सत्ता से नहीं भरनी तिजोरी मजबूत देश बनाना है,
सत्ता से अलग रहकर भी मजबूत राष्ट्र हमें बनाना है।
झूठ छल कपट से नहीं करनी मुझको राजनीति
मैं अटल हूं अपने राष्ट्र को अब अटल स्तंभ बनाना है।।
पूर्णतः मौलिक स्वरचित
सर्वाधिकार सुरक्षित
चन्द्र शेखर मार्कंडेय
पत्रकार एवं साहित्यकार
जिला अमरोहा उत्तर प्रदेश
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