आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

ज्योति एक प्रेम गीत

                
                                                         
                            न जाने उसने हमारे लिये कितना कुछ सहा होगा
                                                                 
                            
वो उम्र भर बन्दी रही होगी
वो उम्र भर दर्द सहती रही होगी
वो एक बेटी भी थी
वो एक बहु भी थी
वो एक भाभी भी थी
वो किसकी मामी भी थी
वो किसकी सखी भी थी,

वो हमारे लिये कड़कती धूप मे चाँद की शीतलता थी
स्वान की मुसलदार बारिश में कृष्ण का गोर्धन पर्वत सी
दुनिया के ताने और शोर में कृष्ण की मुरली की धुन जैसी
वो आईना भी वो ज्वाला भी
वो रेत भी वो लोहा भी
वो कोयला भी कोहिनूर भी
वो एक अनोखी प्यारी
एक सितारा वो है
सबसे मजबूत औरत
हमारी प्यारी माँ
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर