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ज़रूरी तो नहीं

                
                                                         
                            तुमको पसंद आए मेरी हर एक बात,
                                                                 
                            
मेरी मोहब्बत में यह बात हो, ज़रूरी तो नहीं।
तुमको है हक़ कि मुझसे कोई शिकवा करो,
पर मुझे बे-आबरू करो, यह जायज़ तो नहीं।
चाँद को पाने की हसरत हमारी भी है,
पर दूर का चाँद हक़ीक़त हो, ज़रूरी तो नहीं।
मोहब्बत को कहते हैं ख़ुदा की नियामत,
पर अपनी क़िस्मत में यह दौलत हो, ज़रूरी तो नहीं।
एक जैसी हो इश्क़ में दोनों की सोच,
हर मोड़ पर ऐसा ही हो, ज़रूरी तो नहीं।
हार बैठे हैं इश्क़ में अपनी आन-बान,
अब इसके लिए जान भी दे दें, ज़रूरी तो नहीं।
- दिलीप कुमार......
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4 महीने पहले

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