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हम तो जिगर से हिंदुस्तानी है

                
                                                         
                            हम तो जिगर से हिंदुस्तानी हैं
                                                                 
                            

अली सिकंदर तो नहीं हम
ना पोशाक बादशाहों वाली है
इन लोगों ने तो देश जीते थे
हम तो जिगर से हिंदुस्तानी हैं

हजारों ख्वाहिशें उनसे ऐसी रखी
की हर ख्वाहिश पर दम निकले थे
बहुत पाले थे हमने उनसे अरमान
लेकिन फिर भी हम कम निकले थे

अंदाज उनका बड़े काबिले दम था
इश्क और शराब दोनों का संगम था
बड़े आसान लव्ज बोले थे उनसे
फिर भी दिल पर असर कम था

उसी आबाद मिट्टी के थे वे
जिस मिट्टी पर संध्या सूरज डूबे थे
जिगर तो बड़ा था साहब का
पर हमारी मेहमान नवाजी कम थी

अर्ली गीत
बुलंदशहर उत्तर प्रदेश
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3 घंटे पहले

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