किताबों में उसका चेहरा नज़र आता है,
दिल को हर लम्हा उसी का ख़याल आता है।
उसकी आँखें गुलाब, चश्मा भी लाजवाब,
उसे देखूँ तो दिल में नया सवाल आता है।
वो उठकर जो चली जाए महफ़िल से मेरी,
देर तक दिल को उसी का मलाल आता है।
उसकी नज़रों से नज़रें चुरा लेता हूँ,
डर है, आँखों से दिल का राज़ खुल जाता है।
उसके साथ गुज़रता है वक़्त आहिस्ता,
उसके जाने का वक़्त जल्दी आता है।
मेरे ख़यालों में उसकी आँखें, उसका चश्मा,
पेडवा, क्या उसे भी तेरा ख़याल आता है?
— पेडवा
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